Edited By Neetu Bala, Updated: 14 Mar, 2026 11:33 AM

लद्दाख को ‘भारत का मुकुट’ बताते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि वे लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुसार पूरे दिल से काम करेंगे।
लेह/जम्मू (उदय) : विनय कुमार सक्सेना ने चोगलमसर में सैंट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज़ के आर्य नागार्जुन ऑडिटोरियम में शुक्रवार को आयोजित एक समारोह में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के चौथे उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, जस्टिस अरुण पल्ली ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति वारंट पढ़कर सुनाया, जिसके बाद विनय कुमार सक्सेना ने कार्यभार प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए। सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लैफ्टिनैंट गवर्नर के तौर पर कविंदर गुप्ता की जगह ली है।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख पुलिस द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उन्हें लद्दाख के लोगों की सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपी। लद्दाख को ‘भारत का मुकुट’ बताते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि वे लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुसार पूरे दिल से काम करेंगे।
सक्सेना ने कहा कि उनका इरादा लद्दाख भर के गांवों और दूरदराज के इलाकों का दौरा करना है ताकि वे जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझ सकें और व्यावहारिक तथा टिकाऊ समाधानों की पहचान कर सकें। उन्होंने कहा कि लद्दाख में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य प्राथमिकताओं में लद्दाख को देश और दुनिया के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक बनाना है।
इस अवसर पर उपराज्यपाल ने विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों से भी बातचीत की जो उन्हें बधाई देने और लद्दाख के उपराज्यपाल का पदभार संभालने पर अपनी शुभकामनाएं देने के लिए वहां जमा हुए थे। समारोह में उनके सम्मान में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया जिसमें लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई गई।
विनय कुमार सक्सेना अपने साथ कॉर्पोरेट और सामाजिक क्षेत्रों में 3 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव लेकर आए हैं। इस नियुक्ति से पहले उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में कार्य किया जहां उन्होंने शहरी शासन, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उपाय शुरू किए। दिल्ली में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें संजय वन जैसे शहरी वनों को पुनर्जीवित करने, यमुना नदी के किनारे हरित सार्वजनिक स्थानों को विकसित करने, भूमि प्रबंधन सुधार शुरू करने, नागरिक-केंद्रित सुविधाओं को मजबूत करने और शहर के सौंदर्यीकरण की पहलों की देखरेख करने का श्रेय दिया गया।

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