Edited By Sunita sarangal, Updated: 02 Oct, 2026 10:32 AM

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू में कल देर शाम को जम्मू म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (JMC) ने नरवाल फ्रूट मंडी और जम्मू शहर के अलग-अलग हिस्सों में 200 से ज़्यादा प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे...
जम्मू(तनवीर सिंह): जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू में कल देर शाम को जम्मू म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (JMC) ने नरवाल फ्रूट मंडी और जम्मू शहर के अलग-अलग हिस्सों में 200 से ज़्यादा प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे, जिससे व्यापारी समुदाय में चिंता पैदा हो गई थी। इन चिंताओं को दूर करने और मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए, JMC कमिश्नर डॉ. देवांश यादव ने अलग-अलग व्यापार संघों के प्रतिनिधियों और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई।
इस बैठक में जम्मू नॉर्थ के विधायक शाम लाल शर्मा, जम्मू ईस्ट के विधायक युद्धवीर सेठी, बहू के विधायक विक्रम सिंह रंधावा और जम्मू वेस्ट के विधायक अरविंद गुप्ता के साथ-साथ कारोबारी समुदाय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक के दौरान सभी ज़रूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और कमिश्नर ने संबंधित लोगों को JMC की स्थिति और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. यादव ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जारी किए गए कुछ नोटिसों की वजह से आम लोगों और व्यापारी समुदाय में आशंका और चिंता पैदा हो गई थी। इस मामले पर साफ़ करते हुए कमिश्नर ने बताया कि रिहायशी से कमर्शियल इस्तेमाल के नियमों का उल्लंघन और नरवाल फ्रूट मंडी के दुकानदारों को भेजे गए नोटिस, ये दो अलग-अलग मामले हैं। उन्होंने बताया कि फ्रूट मंडी के संबंध में जारी किए गए नोटिस, ACB से कॉरपोरेशन को मिले एक अलर्ट नोट पर आधारित थे। उन्होंने मार्केट के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि JMC ज़रूरी बिल्डिंग परमिशन लेने और मौजूदा ढांचों को रेगुलर कराने की प्रक्रिया पूरी करने में हर संभव मदद और सुविधा देगी, बशर्ते JDA लीज़ के नियमों के तहत ऐसा करना मुमकिन हो।
डॉ. यादव ने आगे कहा कि हाल ही में बदले गए यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज़ में कवरेज, FAR और दूसरे पहलुओं से जुड़े प्रावधान हैं, जो मौजूदा बाज़ारों के व्यवस्थित विकास में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी तकनीकी और कानूनी रूप से संभव हो, वहां और दुकानें बनाने और स्थापित बाज़ारों की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वर्टिकल विस्तार (ऊपर की ओर निर्माण) पर भी विचार किया जा सकता है।
रिहायशी से कमर्शियल इस्तेमाल के मुद्दे पर कमिश्नर ने कहा कि यह एक अलग और लंबे समय से चला आ रहा मामला है और ऐसे कई मामले या तो माननीय अदालतों में लंबित हैं या उनमें दूसरे विवाद शामिल हैं। हाल ही में, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी कॉलोनियों के कमर्शियलाइज़ेशन को रोकने के मकसद से एक आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग बाय-लॉज़ के तहत उपयुक्त मिक्स्ड-यूज़ प्रावधानों की जांच करने की कोशिशें की जा रही हैं, खासकर उन इलाकों में जहां सड़कों की चौड़ाई पर्याप्त है और तय किए गए दूसरे मानक पूरे होते हैं। उन्होंने कारोबारी समुदाय और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को भरोसा दिलाया कि JMC उनके साथ मिलकर काम करना जारी रखेगी और अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर हर संभव मदद, मार्गदर्शन और सुविधा देगी, जबकि पॉलिसी से जुड़े मामलों पर सरकार के साथ सकारात्मक रूप से बातचीत की जाएगी।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे बेवजह घबराएं नहीं और कहा कि प्रशासन का ध्यान स्पष्टता, नियोजित विकास, नियंत्रित वृद्धि और जम्मू के लिए बेहतर आर्थिक अवसर पैदा करने पर है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास सकारात्मक और अनुकूल माहौल में हो।
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