J&K में E-Challan System को लेकर बढ़ी चिंता, High Court Bar Association ने उठाए सवाल

Edited By Naresh Kumar, Updated: 05 Oct, 2026 05:03 PM

concerns rise over the e challan in j k

एसोसिएशन ने ट्रैफिक को सही ढंग से कंट्रोल करने, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक कानूनों को ज़िम्मेदारी से लागू करने की अहमियत को तो माना, लेकिन नए ई-चालान सिस्टम को लागू करने के तरीके और आम नागरिकों, गाड़ी मालिकों और ड्राइवरों पर इसके संभावित असर को लेकर...

जम्मू ( तनवीर सिंह ) :  जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जम्मू (Regd.) ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसका मकसद मोटर व्हीकल कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक चालान सिस्टम में हाल ही में हुए बदलावों और नई पॉलिसी के बारे में अपनी गंभीर चिंताएं जनता के सामने रखना था। एसोसिएशन ने ट्रैफिक को सही ढंग से कंट्रोल करने, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक कानूनों को ज़िम्मेदारी से लागू करने की अहमियत को तो माना, लेकिन नए ई-चालान सिस्टम को लागू करने के तरीके और आम नागरिकों, गाड़ी मालिकों और ड्राइवरों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता भी जताई।

प्रेसिडेंट के. निर्मल कोतवाल के साथ एस. बलदेव सिंह (वाइस-प्रेसिडेंट), प्रदीप मजोट्रा (जनरल सेक्रेटरी), अंशु महाजन (जॉइंट सेक्रेटरी) और राहुल अग्रवाल (ट्रेज़रर) ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ट्रैफिक नियमों को लागू करने में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पारदर्शिता, जवाबदेही, सही प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ होना चाहिए। एसोसिएशन ने ई-चालान के ऑटोमैटिक बनने और वसूली से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों की ओर भी ध्यान दिलाया। ये दिक्कतें खासकर तब आ सकती हैं जब कोई नागरिक कथित उल्लंघन, ड्राइवर की पहचान, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सटीकता या चालान जारी होने के हालात पर सवाल उठाए।

JKHCBAJ (Regd.) ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नियमों को लागू करने वाला सिस्टम, चाहे वह टेक्नोलॉजी के मामले में कितना भी एडवांस्ड क्यों न हो, प्राकृतिक न्याय (natural justice) और कानून की उचित प्रक्रिया (due process of law) के बुनियादी सिद्धांतों से अलग होकर काम नहीं कर सकता। नागरिकों के पास कथित उल्लंघन का आधार जानने, गलत चालान का विरोध करने, सही सुधार या समीक्षा की मांग करने और गलती होने पर असरदार समाधान पाने का सार्थक और आसान मौका होना चाहिए।

एसोसिएशन ने उन आम लोगों को होने वाली दिक्कतों पर भी चिंता जताई जो टेक्नोलॉजी से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं या जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक चालान को देखने, समझने या उनका विरोध करने में परेशानी हो सकती है। एसोसिएशन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डिजिटाइज़ेशन से नागरिकों के लिए और रुकावटें पैदा होने के बजाय न्याय और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होनी चाहिए। JKHCBAJ (Regd.) ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से ई-चालान सिस्टम को लागू करने के तरीके की पूरी समीक्षा करने और यह पक्का करने को कहा है कि इसमें गलत या विवादित चालानों से बचने के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपाय हों। एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि ई-चालान जारी करने, उनकी जांच करने, उन पर फैसला लेने और वसूली करने की प्रक्रिया साफ, पारदर्शी, आसान और निष्पक्षता व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

एसोसिएशन ने साफ किया कि उनकी चिंताएं सड़क सुरक्षा या कानून के मुताबिक ट्रैफिक नियमों के खिलाफ नहीं हैं। बल्कि, मकसद यह पक्का करना है कि नियमों को लागू करना कानूनी, उचित, पारदर्शी और नागरिकों के हित में हो, और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल लोगों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के अनुरूप किया जाए।

JKHCBAJ ने फिर से कहा कि कानूनी समुदाय की अहम भूमिका है कि वह जनता के अधिकारों से जुड़े मामलों को सही अधिकारियों और आम जनता के ध्यान में लाए। एसोसिएशन नई व्यवस्था के कानूनी और व्यावहारिक असर की जांच करती रहेगी और न्याय व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी।

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